Wednesday, July 14, 2010

५० साल में बालों में १०० बार बदलाव !


 ब्रिटेन में हुए एक सर्वेक्षण के मुताबिक एक महिला अपने जीवन में औसतन 104 बार 'हेयर स्टाइल' बदलती है। समाचार पत्र 'डेली मेल' के अनुसार महिलाएं 13 से 65 वर्ष की उम्र में कई बार 'हेयर स्टाइल' बदलती हैं। वे साल में कम से कम दो बार बालों की लेयरिंग कराती हैं और बालों को रंगती भी हैं। यही नहीं वे अपने बालों को छोटा भी कराती हैं।
सर्वेक्षण करने वाले हेयरड्रेसर एंड्रयू कोलिंग के मुताबिक ज्यादातर महिलाएं सालभर में अपने बालों के कम से कम तीन बार रंग बदलने की कोशिश करती हैं। इनमें गहरा भूरा रंग (डार्क ब्राउन) सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। अधिकतर देखा जाता है कि दो तिहाई महिलाएं कम से कम एक बार अलग दिखने की कोशिश करती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि महिलाओं के हेयरड्रेसर उनके पुराने 'हेयर स्टाइल' को बोरियत बताते हैं। दूसरा सबसे बड़ा कारण बदलते हुए रिश्ते हैं। महिलाएं नए रिश्ते के साथ नए रूप में दिखना चाहती हैं। यह सर्वेक्षण 3,000 महिलाओं पर किया गया। जिसमें पाया गया कि 44 फीसदी महिलाएं बोरियत की वजह से बाल के रंग या 'हेयर स्टाइल' बदलती हैं, जबकि 61 फीसदी ने कहा कि वह अपने में बदलाव देखना चाहती हैं।(साभार:मेरीखबर.कॉम )

Friday, June 25, 2010

कुत्ते के प्रेम में घर ही रंग दिया...

जो गुजर गए, उनकी निशानियां उनकी याद दिलाती हैं। लेकिन क्रोएशिया के एक परिवार ने इस दिशा में एक कदम बढ़ कर काम किया है। उन्होंने भगवान को प्यारे हो गए अपने डालमेशियन कुत्ते की याद में अपने घर को ही ब्लैक एंड ह्वाइट पेंट से धब्बेदार रंगवा दिया। 55 वर्षीय गोरेन टोमेस्टिक अपने कुत्ते बिंगो की याद में कुछ करना चाहते थे। सो उन्होंने अपने घर की बाहरी दीवारों को कुत्ते के रंग में रंगवा दिया। उनका यह पालतू कुत्ता एक सड़क दुर्घटना में मर गया था।
गोरेन ने बताया, हमें बिंगो से बहुत प्यार था। हम उसकी यादों को हमेशा अपने बीच रखना चाहते हैं। हमारा घर अब उसकी याद दिलाता रहेगा। लेकिन गोरेन के इस प्रयास से उनके पड़ोसी खुश नहीं हुए। दरअसल ब्लैक एंड ह्वाइट टेढ़े-मेढ़े धब्बे देखकर उनके सिर में दर्द पैदा होने लगा। उन्होंने शिकायत की। पड़ोसियों की इस शिकायत पर गोरेन अब अपने घर को दूसरे रंग में रंगवाएंगे। उनकी पड़ोसन बोरिस्लावा ट्रेगिन ने कहा, भगवान का शुक्र है उन्हें यह बात समझ तो आई। मैं बाहर से पीले रंग के घर को देखकर रह सकती हूं। लेकिन उस धब्बेदार पेंट को देखकर मेरे सिर में दर्द हो जाता है।(source:yahoo.com)

चिट्ठी भेजकर आई मौत!

इसे किसी की साजिश करार दिया जाए या मजाक। जो भी हो, मगर इस साजिश या मजाक ने एक वृद्ध की जान ले ली। घटना के बारे में जो भी सुन रहा है, वही अपने दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो जाता है। कोतवाली नगर थाना क्षेत्र के कैलावालान, दिल्ली गेट मोहल्ले में थान सिंह नामक व्यक्ति का परिवार रहता है। 70 वर्षीय वृद्ध थान सिंह दूध की डेयरी चलाते थे। जबकि उनके तीनों पुत्र आटा चक्की चलाने का काम करते हैं। विगत 22 जून को थान सिंह के मकान पर एक रजिस्टर्ड लिफाफा पहुंचा। जब इस लिफाफे को खोला गया तो परिवार का हर कोई सदस्य सन्न रह गया।
दरअसल, रजिस्टर्ड लिफाफे में कुछ और नहीं बल्कि थान सिंह के अंतिम संस्कार की श्मशान घाट की पर्ची थी। पर्ची में उल्लेख था कि थान सिंह की मौत विगत 17 जून को हो गई थी। जबकि 18 जून को उनका अंतिम संस्कार हिंडन स्थित श्मशान घाट के 5 नंबर प्लेटफार्म पर कर दिया गया। पर्ची पर थान सिंह का नाम, पता व टेलीफोन नंबर पूरी तरह से ठीक था।
अपने ही अंतिम संस्कार की पर्ची देखकर खुद थान सिंह का माथा ठनक गया। परिजनों का कहना है कि इसके बाद से ही थान सिंह तनाव में आ गए थे। शायद यही कारण रहा कि रजिस्टर्ड डाक से पर्ची मिलने के अगले ही दिन सुबह थान सिंह की मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि पर्ची के बाद से ही वह इस कदर तनाव में थे कि शायद उन्हें हार्टअटैक हो गया।
परिजनों ने हिंडन घाट पर जाकर जब इस पर्ची की बाबत जानकारी हासिल की तो पता चला कि उक्त पर्ची फर्जी है। किसी ने फर्जी तरीके से पर्ची छपवाकर इस घटना को अंजाम दिया।(source:yahoo.com)